हकीकत
पत्थर बनूँ या हकीकत या बनूँ किसी की नसीहत। बता दे ऐ खूबसूरत निगाहें क्या है तेरी हकीकत।। क्या है तेरे दिल में, क्यों है तू मेरे दिल मे, क्या ये परिस्थिति हैं। खालीपन है मेरे दिल मे,भरना इसे चाहता हूँ, मै तुझसे मिलना चाहता हूँ।। मूरत सी हसीन सूरत तेरी,सूरज सी रोशन हकीकत तेरी। मित्रगण देते हैं नसीहत तेरी,कैसे बनाऊँ तुझे हैसियत मेरी।। नाम तेरा मीठा सा,सीरत तेरी हसीन है,तू तीखी बड़ी नमकीन है। पत्थर बनूँ या हकीकत या बनूँ फिर किसी की नसीहत।।

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