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Shadow love

Shadow love,story of shadow who fallen love with a girl.but he face many problem to confront his love because he has no human body. To know what happen between shadow and girls.listen this story and subscribe to this channel https://youtu.be/4zmLU9SFDKc

Smritiyaksh lovestory

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हकीकत

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पत्थर बनूँ या हकीकत या बनूँ किसी की नसीहत। बता दे ऐ खूबसूरत निगाहें क्या है  तेरी  हकीकत।। क्या है तेरे दिल में, क्यों है तू मेरे दिल मे, क्या ये परिस्थिति हैं। खालीपन है मेरे दिल मे,भरना इसे चाहता हूँ, मै तुझसे मिलना चाहता हूँ।। मूरत सी हसीन सूरत तेरी,सूरज सी रोशन हकीकत तेरी। मित्रगण देते हैं नसीहत तेरी,कैसे बनाऊँ तुझे हैसियत मेरी।। नाम तेरा मीठा सा,सीरत तेरी हसीन है,तू तीखी बड़ी नमकीन है। पत्थर बनूँ या हकीकत या बनूँ फिर किसी की नसीहत।।

Jharokhe

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मौसमों के झरोखों कि ये अंगड़ाइयाँ, कभी रूप बदलती है तोह कभी साज बदलती है। ना जाने क्यों मीठी सी बहुत लगती है, इन झरोखों की बात ही बड़ी बेढंगी सी लगती है। ये अंगड़ाइयाँ लेती है जब जोर से करबटे, तो दिल मे नई उमंग सी उमड़ती है । दिल को छेड़ती है नई तरंगे लहर की, तोह बात भी साज नये छड़ती है। ये सौंदी खुसबू इन झरोखों की, कभी रूप बदलती है तोह कभी साज बदलती है। बैठ के मुंडेरों पर जब दिल मे उतरती है, ये झरोखों की अंगड़ाईयाँ राग नये उड़ेलती है। मौसम भी यू भीना भीना लगता है, ढांचा भी शरीर का यू हिलता है। जब ताल से ताल तू मिलती है, मौसम के झरोखों की ये अंगड़ाइयाँ, कभी रूप बदलती है तोह कभी साज बदलती है।

उमष की वियथा ।

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ऊष्म उठी घुटन मे, महसूस कर मेरा जिय रोने लगा। देख ऊष्म की प्रचंडता, मेरा मन शीत को ललचाया ।।  लहर उठी जब शीत की,मेरा मन खुशी से हर्षाया ।  देख मेरे मन की हर्षन को,ऊष्म को थोड़ा क्रोध आया।। मायूस हुई उमष बोली,क्यों मेरे मन को दुखी किया। सुन उमष की ये वियथा,मेरा दिल जोर से मुस्काया।। मेरी वियन्ग मुस्कान से,ऊष्म को थोड़ा रोना आया। मायूस हुई उमष बोली,क्यों फिर से तूने दुखी  किया।। लगी सोचने ऊष्म जब,कि कैसे इसको समझा ऊँ। क्या है अहमियत  मेरी, ये कैसे तुझको बतला ऊँ।। माऊस है मन मेरा, ये मे तुझको कैसे बतला ऊँ। लगी सोचने ऊष्म जब,कि कैसे इसको समझा ऊँ।। थोड़ी देर हुई जब ना जाने, क्यों शीत ने कहर बरसाया। देख शीत की ये अबस्था,मेरा मन उलझन में पड़ आया।।  कैसी गलती हुई मुझसे,जो शीत ने हाथ मुझसे छुड़ाया। कहने लगी शीत मुझसे, क्यों मेरी सखी का अपमान किया।। सुन शीत की ये बाणी,मुझे ऊष्म का  खयाल आया। भारी अचरज हुआ मुझे,क्यों ऊष्म का अपमान किया।। ये सोच कर हुई उलझन भारी, कैसे उमष को मनाऊंगा। सुन शीत की ये बाणी, मुझे ऊष्म का खयाल आया ।। देख मेरी इस उलझन को,...
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खयाली बारिश । चंचल चांदी बून्द फुआरी बरस रही रिमझिम रिमझिम बारिश कैसे । देख उसको महसूस करने भागा सड़क पे पानी जैसे।। मिलके उन फुआरो से देख उनकी धीमी थापकरो से । देख बून्द मन मचला मेरा जैसे उबले चांदी के गुब्बारे जैसे।। आंख बंद कर जब खयाल आया बून्द देख मुझे रोना आया । घर छोड़ यहाँ बैठा हूँ कोई बड़ा सफर हो जैसे । चंचल चांदी बून्द फुआरी बरस रही रिमझिम रिमझिम बारिश कैसे।।

Mulaquat

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This saturday get ready for love someone with full of tragedy.because i upload my mulaquat first part.